शरीर के त्रिदोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित कर प्राकृतिक आरोग्यता प्रदान करने की मुख्य चिकित्सा पद्धति।
स्नेहन, स्वेदन और वमन जैसी पांच विशिष्ट शोधन क्रियाओं हेतु सर्वसुविधायुक्त एवं पवित्र चिकित्सा कक्ष।
अनुभवी वैद्यों द्वारा नाड़ी की गति और स्पंदन के माध्यम से शारीरिक व मानसिक रोगों का सटीक निदान।
चिकित्सालय परिसर में स्थित दुर्लभ औषधीय पौधों की वाटिका, जहाँ से ताज़ा जड़ी-बूटियाँ प्राप्त की जाती हैं।
शरीर और मन के सामंजस्य के लिए शांत एवं सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण विशेष ध्यान व योग सत्र।
उपचार के दौरान वैद्यों के निर्देशानुसार शुद्ध, सुपाच्य और सात्विक आहार की विशेष व्यवस्था।