महाशय धरमपाल जी एवं श्री राजीव गुलाटी जी
भारतीय संस्कृति, वैदिक शिक्षा एवं गुरुकुल परंपरा के संरक्षण और विकास में समाज के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसी भावना के अंतर्गत महाशय धरमपाल जी एवं श्री राजीव गुलाटी जी का स्वामी आत्मानन्द वैदिक गुरुकुल के प्रति विशेष सहयोग रहा है।
गुरुकुल केवल भवनों का निर्माण नहीं करता, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान, संस्कार, अनुशासन, चरित्र और जीवन-मूल्यों का निर्माण करने का प्रयास करता है। इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने में प्राप्त आर्थिक सहयोग ने गुरुकुल के विभिन्न भवनों एवं आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
महाशय धरमपाल जी एवं श्री राजीव गुलाटी जी जैसे उदार सहयोगकर्ताओं का योगदान हमारे लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि वैदिक शिक्षा और गुरुकुल परंपरा के प्रति विश्वास एवं सद्भाव का भाव है। उनके सहयोग से गुरुकुल परिसर के विकास को गति मिली और अनेक ब्रह्मचारियों के लिए अध्ययन, निवास एवं संस्कारपूर्ण जीवन का बेहतर वातावरण तैयार करने में सहायता मिली।
स्वामी आत्मानन्द वैदिक गुरुकुल परिवार उनके इस सहयोग के लिए हृदय से कृतज्ञ है। हम मानते हैं कि ऐसे सेवा-भाव से किए गए सहयोग समाज में शिक्षा, संस्कार और भारतीय ज्ञान-परंपरा के कार्यों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देते हैं।
हम परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं कि महाशय धरमपाल जी एवं श्री राजीव गुलाटी जी को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, सुख, शांति एवं समृद्धि प्रदान करें। ईश्वर उन्हें सदैव सामर्थ्यवान रखें और समाज, शिक्षा, संस्कृति तथा मानवहित के कार्यों में सेवा एवं सहयोग करने की शक्ति प्रदान करते रहें।
गुरुकुल परिवार की ओर से दोनों महानुभावों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता एवं सादर आभार।
— स्वामी आत्मानन्द वैदिक गुरुकुल परिवारमलारना चौड़, सवाई माधोपुर, राजस्थान
